अनुसंधान क्षेत्र

I. जिनोमिक्‍स और मॉलिक्यूलर मेडिसिन

जिनोमिक्‍स और मॉलिक्यूलर मेडिसिन आईजीआईबी का प्रमुख अनुसंधान केन्‍द्र बिंदु है। आईजीबीआई में कई समूह वाले अभ्‍यर्थी जीन पहुंच का प्रयोग करते हुए जटिल रोगों के जेनेटिक्‍स की खोज करने में भारतीय जिनोम वेरियेशन कंसोर्शियम जैसी बड़ी संयुक्‍त परियोजनाओं से ये मानव रोगों के मॉलिक्यूलर आधार के अध्‍ययन में शामिल हैं।
ये निम्‍न पर अपना ध्‍यान केन्‍द्रित करते हैं:

* सिजोफ्रेनिया जैसे तंत्रिका मनोवैज्ञानिक रोग
* हृदय संवहनी संबंधी रोग
* मधुमेह और अन्य जटिल रोग

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II.श्वसन रोग संबंधी जीवविज्ञान

इस चुनौती पूर्ण क्षेत्र से जूझने के लिए क्लीनिकल, जेनेटिक, मॉलिक्यूलर और ड्रग विकसित करने के दृष्‍टिकोणों का उपयोग करते हुए श्‍वसन रोगों पर आईजीआईबी के कई महत्‍वपूर्ण वैज्ञानिकों का फोकस है।
जिन रोगों में रूचि है, वे निम्‍न प्रकार हैं:

* ट्यूबरक्लोसिस
* अस्‍थमा और एलर्जी
* क्रोनिक ओब्‍सट्रक्‍टिकव पल्‍मुनरी डिस्‍ऑर्डर (सीओपीडी)
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III.जिनोम इंफोर्मेटिक्‍स और संरचनात्‍मक जीवविज्ञान

आईजीआईबी ने इन वर्षों में उच्‍च सुनिश्‍चित आंकड़ा विश्‍लेषण और जिनोम संबंधी टिप्‍पणियों में विशेषज्ञता हासिल की है। यह आनुवांशिकता परिवर्तन डाटाबेस को एक करने के लिए जेन2फेन संघ जैसे अंतर्राष्‍ट्रीय प्रयासों में भागीदारी कर रहा है। जिनोम इंफॉर्मेटिक्‍स आईजीआईबी के अधिकांश अन्‍य अनुसंधान क्षेत्रों का एक अभिन्‍न हिस्‍सा है और माध्‍यमों और संकल्‍पना के विकास में योगदान देता है। वे क्षेत्र जहां इंफोर्मेटिक्स ने जिनोम विश्‍लेषण में सहयोग दिया है उन में सम्मलित है:

* भारतीय जिनोम परिवर्तन: जिनोम परिवर्तन आंकड़े का विश्‍लेषण
* अगली-पीढ़ी अनुक्रम, सहजोड़ और टिप्‍पणी
* फैले हुए प्रोटीन और आसंजन
* माइक्रो आरएनए- लक्ष्‍य इंट्रेक्‍शन का अनुमान
* जिनोम में संरचनात्‍मक विनियामक अनुकल्‍प

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IV. ऊर्जा और पर्यावरणीय जैव प्रौद्योगिकी

आईजीआईबी के वैज्ञानिक भारत में समृद्ध माइक्रोबियल भिन्‍नता की खोज कर रहे हैं और पर्यावरण और ऊर्जा संबंधी संकट से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए इस संसाधन का उपयोग कर जैवप्रौद्योगिकीय अनुप्रयोगों के विकास में लगे हैं। जिन अन्‍य क्षेत्रों में खोज की जा रही है वे क्षेत्र है:
* माइक्रोबियल भिन्‍नता और इसकी खोज
* कचरे से हाइड्रोजन और बायोप्‍लास्‍टिक
* माइक्रोब से अशोधित जल का शोधन

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V.रासायनिक और प्रणालीगत जीवविज्ञान

कई जीवविज्ञानिक घटनाओं को समझने के लिए रासायनिक दृष्‍टिकोण अनिवार्य है। आईजीआईबी में कई अनुसंधान समूह समकालीन अनुसंधान समस्‍याओं जिनमें अंतर अनुशासनिक चर्चा की आवश्‍यकता है, के समाधान के लिए रसायन और जीवविज्ञान के विभिन्‍न भागों में अपनी भिन्‍न विशेषज्ञताओं के उपयोग के लिए साथ मिलकर कार्य किए। इस क्षेत्र में आईजीआईबी में किए गए अनुसंधानों में शामिल हैं:
* एम ट्यूबरक्‍लोसिस और त्‍वचा रंजकता का रासायनिक जीवविज्ञान और प्रणाली जीवविज्ञान
* जीवविज्ञान अनुप्रयोगों के लिए रासायनिक रूप से परिवर्धित ओलिगोनूक्‍लियोटाइड्स
* सूक्ष्‍म जैव प्रौद्योगिकी
* नोवल इम्‍यूनोसरी प्रक्रिया
* नए अणु:

  • बायोचिप विकास के लिए संबंधक
  • पेप्‍टाइड स्‍केफोल्‍ड और पेप्‍टीडोमिनेटिक्‍स
  • क्‍वाड्रुप्‍लेक्‍स जो लिगेंड्स को स्‍थिर करता है

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VI. आयुर्जिनोमिक्‍स

आयुर्जिनोमिक्‍स एक उभरता हुआ अंतर अनुशासनिक परियोजना है जो आधुनिक जिनोमिक्‍स और आयुर्वेद के परंपरागत ज्ञान आधार के तौर तरीके और जूड़ी को निर्धारित करता है।

वे निम्‍न पर फोकस करते हैं:

* प्रकृति के अनुवांशिक घटक
* जनसंख्‍या स्‍तरीकरण
* स्‍वास्‍थ्‍य और रोग स्‍तरों हेतु प्रणालीगत जीवविज्ञान

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